2026-02-18

उत्तराखंड: वनाग्नि से निपटने के लिए पहली बार विभाग द्वारा निर्माण किए गए फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड ऐप एवं फॉरेस्ट फायर मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से पहली बार राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल संपन्न

SDRF Coordination
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Field Training
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उत्तराखंड: वनाग्नि से निपटने के लिए पहली बार विभाग द्वारा निर्माण किए गए फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड ऐप एवं फॉरेस्ट फायर मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से पहली बार राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल संपन्न देहरादून। उत्तराखंड में आगामी फायर सीजन (वनाग्नि काल) की तैयारियों को पुख्ता करने के लिए वन विभाग ने एक ऐतिहासिक पहल की है। राज्य में पहली बार 'फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड ऐप एवं फॉरेस्ट फायर मॉनिटरिंग सिस्टम' की सहायता से बड़े स्तर पर राज्य स्तरीय 'वनाग्नि मॉक ड्रिल' का सफल संचालन किया गया।

तकनीकी कौशल और त्वरित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से वनाग्नि की सूचनाओं के आदान-प्रदान और फील्ड स्तर पर रेस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करना था। मॉक ड्रिल के दौरान, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के माध्यम से विभिन्न वन प्रभागों को 'मॉक अलर्ट' जारी किए गए। इन अलर्ट्स पर प्रभागों ने समानांतर रूप से त्वरित कार्यवाही करते हुए रिपोर्टिंग सिस्टम का उपयोग किया, जिससे डेटा साझाकरण और समन्वय की सटीकता को परखा गया।

विभागीय समन्वय की नई मिसाल उत्तराखंड के इतिहास में यह पहला अवसर था जब वन विभाग के साथ एसडीआरएफ (SDRF) और राजस्व विभाग ने संयुक्त रूप से इस ड्रिल में प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस संचार, और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी भूमिका निभाई।

संयुक्त ऑपरेशन आग लगने की काल्पनिक स्थिति में राजस्व विभाग द्वारा सूचना सत्यापन और SDRF द्वारा राहत व बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।

सामुदायिक भागीदारी ड्रिल में वन पंचायतों, ग्राम स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समितियों और महिला मंगल दलों को भी शामिल किया गया, जो जमीनी स्तर पर वन विभाग की 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' इकाई हैं।

प्रमुख विशेषताएं और प्रभाव रियल-टाइम मॉनिटरिंग: फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड ऐप एवं फॉरेस्ट फायर मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से उपग्रह से प्राप्त अग्निकांड की सूचनाओं को चंद मिनटों में संबंधित बीट अधिकारी तक पहुँचाने का परीक्षण किया गया।

ICCC की भूमिका देहरादून स्थित कमांड सेंटर ने पूरे राज्य के 40 से अधिक वन प्रभागों के बीच संचार सेतु का कार्य किया।

तैयारियों का आकलन मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन) के अनुसार, इस ड्रिल से फायर लाइनों की सफाई, मास्टर कंट्रोल रूम की सक्रियता और उपकरणों की कार्यक्षमता का वास्तविक मूल्यांकन हुआ है।

इस मॉक ड्रिल की सफलता ने यह सुनिश्चित किया है कि उत्तराखंड इस वर्ष वनाग्नि की चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय के साथ पूरी तरह तैयार है।

इस मॉक ड्रिल को ICCC में श्री सुशांत पटनायक, सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक), श्री वैभव कुमार सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी, चकराता के द्वारा मॉनिटर किया गया।