चकराता, उत्तराखंड — 25 जून 2026: प्रभागीय वनाधिकारी, चकराता वन प्रभाग, चकराता के कार्यालय द्वारा कालसी उप प्रभाग के अन्तर्गत आरक्षित वन क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन, अवैध भण्डारण एवं अनाधिकृत परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने के निर्देश जारी किए गए हैं। उप प्रभागीय वनाधिकारी, कालसी को जारी आदेश में भारतीय वन अधिनियम 1927 के प्रावधानों के अन्तर्गत सख्त विधिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं।
कालसी उप प्रभाग के अन्तर्गत यमुना एवं टौंस नदी क्षेत्र पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील हैं और अवैध रेत एवं खनिज उत्खनन के प्रमुख केन्द्र बिन्दु बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में अनाधिकृत खनन न केवल वन आवरण तथा नदी तटीय पारिस्थितिकी को नष्ट करता है, बल्कि राज्य के राजस्व की भी क्षति करता है। यह समन्वित प्रवर्तन अभियान उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा तथा वन एवं पर्यावरण कानूनों के कठोर पालन के प्रति वन विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। चकराता वन प्रभाग द्वारा पहले ही पत्रांक 2290/1-1, दिनांक 17 जनवरी 2026 के माध्यम से एक सुरक्षा दल का गठन किया जा चुका था। इस दल को निम्नलिखित पाँच प्रमुख निर्देश दिए गए थे:
उप प्रभागीय वनाधिकारी, कालसी को निर्देशित किया गया है कि वे रीवर रेंज एवं रामपुरमण्डी के आरक्षित वन क्षेत्रों में तत्काल विशेष अभियान चलाएं। यह अभियान मुख्यतः अवैध खनन कार्यों, खनिज के अवैध भण्डारण एवं आरक्षित वन सीमा के भीतर अनाधिकृत परिवहन को लक्षित करेगा। ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले सभी दोषियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत कठोर विधिक कार्यवाही की जाएगी। उप प्रभागीय वनाधिकारी को अभियान पूर्ण होने पर विस्तृत आख्या प्रभागीय वनाधिकारी चकराता को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।